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परंपरा से आधुनिकता

स्विट्जरलैंड से होटल मैनेजमेंट की डिग्री के साथ लौटते हुए डेवल टिबरेवाला के दिमाग में कुछ निश्चित विचार थे। टिबरेवाला का परिवार शिलॉन्ग में एक चार-सितारा होटल पोलो टावर्स चलाता है, जिसे कम ही लोग जानते हैं। लेकिन एक और सितारा अपने होटल में जोड़ने या दूसरे शहरों में अपने ब्रांड का विस्तार करने के प्रयास करने के बजाए टिबरेवाला ने इसमें कुछ मनोरंजन जोड़ने का फैसला लिया।

इसका नतीजा कोलकाता में एक नया लक्जरी होटल, जिसमें दूसरी चीजों के साथ चीज की तरह की आकृति का इस्तेमाल किया गया है। टिबरेवाला का कहना है, 'हम लोग स्टैंडर्ड लक्जरी होटलों की स्टैंडर्ड नकली मुस्कान से ऊब चुके हैं।'

उनका कहना है, 'हमने कुछ मनोरंजन के साथ होटल तैयार करने का फैसला लिया, इसलिए हमने मेरी होटल्स तैयार करने का फैसला लिया।' आकर्षक होटलों को बनाने के लिए उन्होंने नई कंपनी चॉकलेट होटल्स बनाई है, जिसमें मेरी एक प्रमुख शब्द है। चॉकलेट होटल्स लाइफस्टाइल होटलों की नई शृंखला का नेतृत्व कर रही है।

ये ऐसे होटल हैं जो नई पीढ़ी और कुछ ऐसे लोगों को जो होटल में होने वाले रोजमर्रा के बदलावों, जैसे चादर, परदों आदि का बदलना, बाथरूम में मिलने वाले मुफ्त के उपहार और अव्यवस्थित बफे से कुछ अधिक चाहते हैं, को लक्षित कर रहे हैं।

कोलकाता में टिबरेवाला का होटल क्रोम, होटल कारोबार की ज्यादातर अवधारणाओं को खारिज करता है। एक पारंपरिक मुख्य प्रवेश की जगह, कोलकाता में इस परिसंपत्ति में एक कोने में दरवाजा है। इस होटल में 63 कमरे हैं, जिन्हें सात श्रेणियों में बांटा गया है और सभी में आधुनिक हाई-टेक फीचर जैसे बोस के स्पीकर्स और उच्च दबाव वाले फव्वारे शामिल हैं।

अब आप शेव बनाते हुए कांच के पार्टिशन के जरिये टेलीविजन भी देख सकते हैं। आम तौर पर कमरों के दरवाजों पर दिखाई देने वाला 'डू नॉट डिस्टर्ब' का कार्ड बदलकर 'द ऑब्वियस' हो गया है। टिबरेवाला का कहना है, 'हम लक्जरी पर समझौता नहीं कर रहे और हमने सब चीजें बेहतरीन लगाई हैं, लेकिन ये थोड़ी कम भड़काऊ हैं।'

उनका मानना है कि उनके लक्षित मेहमान वे हैं जो पारंपरिक चीजों के साथ जुड़ नहीं जाते। महिमा हॉस्पिटैलिटी के धीरज अरोड़ा हैं जो ग्राहकों के साथ जुड़ जाते हैं। अरोड़ा ने नई दिल्ली में एक दशक पहले ट्रेंडी लाउन्ज-बार शालोम शुरू किया था। उन्हें लगने लगा कि 'नई पीढ़ी के भारतीय' जल्दी-जल्दी उनके लाउन्ज-बार में पहुंच रहे हैं।

अरोड़ा याद कर कहते हैं, 'ये वे लोग नहीं हैं जो पीने के लिए आते हैं, वे कुछ समय बिताने आते हैं। कुछ तो ऐसे मेहमान हैं जो व्यस्त शामों में हमारे लड़कों के साथ उनका हाथ बंटाने में शर्म भी महसूस नहीं करते और कुछ बत्तियां और एयर-कंडीशनर बंद होने के बाद भी बैठे रहते हैं, क्योंकि वे इसे अपनी जगह मानते हैं।'

पांच साल पहले शालोम की ओर से गोवा में सोल वैकेशन की शुरुआत हुई, जिसमें भूमध्य आकर्षण, बाग में योग और खुशमिजाज कर्मियों को रखा गया, जिन्हें बताया गया कि उन्हें मेहमानों का स्वागत करने के लिए 'ताज या ओबेरॉय शैली' को नहीं अपनाना है, लेकिन इसे उनसे काफी नजदीक होना चाहिए। अरोड़ा कहते हैं कि आज जिस हाल में यह चल रहा है, उसकी चाबी उनके लड़के हैं।

अरोड़ा का कहना है, 'निरंतर आने वाले लोग होटल में आरक्षण के लिए ई-मेल नहीं करते, वे सिर्फ हमारे किसी लड़के को बता देते हैं।' आज जो मेहमान हैं वे युवा भारतीयों की नई खेप को दिखाते हैं जो पश्चिमी तरीके में किसी पद, किसी उम्र को नहीं मानते और पांच सितारा लक्जरी होटलों के भारी-भरकम और अलग स्वागत को नहीं ढूंढ़ते, लेकिन होटल में प्रवेश के नए से नए तरीके चाहते हैं।

वैश्विक होटल कारोबार में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में  पर्यटकों के लिए अपस्केल होटल रहे हैं। ये पर्यटक कड़े मुकाबले, पर्यावरण या सांस्कृतिक संवेदनशील अनुभवों के लिए असेंबली-लाइन अवधारणा से परहेज करते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी हॉस्पिटैलिटी कंपनियों में से एक स्टारवुड होटल्स ने इस श्रेणी में दो पेशकश दी हैं।

अलॉफ्ट (जिसके साथ कंपनी की योजना भारत में जल्द आने की है) और एलीमेंट (पिछले साल अमेरिका में लॉन्च किया गया, लेकिन अभी भारत को लेकर कोई योजना नहीं है)। जहां अलॉफ्ट में मेहमानों का स्वागत 'अलोहा' के साथ होगा, वहीं फ्रंट डेस्क निरीक्षक हो सकता है कि गीतों से आपका स्वागत करें।

जैसा कि इसका नाम ही है, एलीमेंट पर्यावरण अनुकूल अवधारणा को लिए है। मुख्यधारा की शृंखलाओं से पुराने मोल्ड को खत्म करने का प्रयास भी देखा जा सकता है, जैसा कि ला मेरीडियन के आर्ट+टेक की अवधारणा में दिखाई देता है। इसके अलावा यहां लक्जरी परिसंपत्ति भी हैं, जिनमें अरमानी और बुलगारी के कुछ फैशन ब्रांडों को रखा गया है।

भारत में भी नई शृंखलाएं जैसे चॉकलेट और शालोम के साथ जूरी (दुबई की फीनिक्स होटल्स समर्थित) और इस्टा (मूल कंपनी का हिमालयाज में स्पा आनंद है), दी लेमन ट्री को वर्ष 2002 में ताज से पहले जुड़े पाटु केसवानी ने शुरू किया था, को परंपरा को तोड़ने वाले प्रयासों के रूप में देखा जा सकता है।

होटल शृंखलाओं में बदलाव का एक लोकप्रिय तरीका पर्यावरण-अनुकूल (अनुसंधान बताता है कि ग्राहक अब भी रोज बिस्तर की चादर बदलना पसंद करते हैं और वे पर्यावरण-अनुकूल होने के लिए अधिक भुगतान नहीं करना चाहते) भी है, वहीं अभी भारत में इस श्रेणी में विकास होना बाकी है।
हैदराबाद में होटल पार्क जो इस श्रेणी में नया शामिल हो रहा है, की अध्यक्ष प्रिया पॉल का कहना है, 'फूड माइल्स (पैदावार की जगह से ग्राहकों तक पहुंचना) और कार्बन फुटप्रिंट्स की अवधारणा अब भी भारतीय होटलों से दूर है।' हालांकि नई होटल कंपनियां डिजाइन के जरिये अपनी उसी जगह में बड़े बदलाव कर उन्हें नया रूप-रंग दे रही हैं।

इसके चलते वे अपने दिमाग में पश्चिम के चलन को रखती हैं, जहां कड़े मुकाबले का माहौल है, जिसमें बर्लिन में होटल क्यू! (जिसमें बाथ टब आपके बिस्तर की बगल में है) और मिलान में स्टार्फ (कड़े स्लेट, कंक्रीट और लोहे का इस्तेमाल कर अस्त-व्यस्त दिखने वाले दरवाजे हैं, जो बमुश्किल बाथरूम को ढक पाते हैं) के कमरों में बिस्तर पर कंबल को सही तरीके से तय लगाने की जगह उन्हें फेंक दिया जाता है।

भारत में, अभी इस हद तक के प्रयोगों की शुरुआत नहीं हुई है, लेकिन होटल के डिजाइनों में बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं। इस्टा परिसंपत्ति ने बैंकॉक की पीआईए एसोसिएट्स को उसके ट्रेडमार्क में भयंकर डिजाइन से बचाने के लिए करार किया है।

आईएचएचआर हॉस्पिटैलिटी (आनंद समूह) के मार्केटिंग उपाध्यक्ष महेश नटराजन का कहना है, 'मिसाल के तौर पर दीवारों के नाम पर दीवारें नहीं हैं।' इसके बजाए, हर परिसंपत्ति के डिजाइनों में संवेदनाओं को स्थानीय प्रेरणा- शिल्प, संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों से लिए गए हैं। होटलों को पर्यावरण-अनुकूल दिखाना भी इन दिनों एक बड़ी कवायद के रूप में देखने को मिला रहा है।

हैदराबाद में होटल प्राकृतिक पहाड़ी क्षेत्र पर फैला हुआ है। नटराजन का कहना है, 'कई होटल कारोबारी इस चीज पर अपना दिल खो चुके हैं।' उनका कहना है, 'हमने इसके आस-पास अपनी परिसंपत्ति तैयार की है।' आज जोर 'प्राकृतिक के पांच तत्वों के संगम' को लाने पर है। यहां खुले सार्वजनिक क्षेत्र हैं, बड़ी मात्रा में पानी के स्रोत हैं, बाहरी माहौल को अंदर लाने की कोशिश की गई है और स्नान को डिब्बों के आकार से बेहद दूर रखा गया है।
नटराजन का कहना है, 'भारी-भरकम लक्जरी के बजाए हम प्रचलित, हल्की लक्जरी चाहते हैं।' यह प्रिया पॉल की अध्यक्षता ही थी, जिमें पार्क होटल कारोबार में कई मॉर्डन डिजाइनों को शामिल करने की प्रक्रिया की शुरुआत की गई- शृंखला ने सबसे पहले विदेशी विशेषज्ञों (कॉनरैन ऐंड कंपनी) को बुलाया और अपनी परिसंपत्ति में विभिन्न जगहों में कई बड़े बदलाव किए।

अब भारत में होटल की नई शृंखलाएं इस कवायद को आगे बढ़ा रही हैं। कोलकाता के क्रोम में होटल लॉबी में 110 लेड लाइटें लगाई गई हैं, जो शहर के भाव के अनुसार अपना रंग बदल सकती हैं। अगर शहर खुश है तो रोशनी गुलाबी रंग की होगी, अगर उदास है तो रंग बदल कर नीला हो जाएगा।
बेंगलुरु में जूरी में लाउन्ज भी बनाया गया है, जिसे तापमान-नियंत्रण पूल के पास डिजाइन किया गया है। जूरी के निदेशक आदित्य कमानी का कहना है, 'कुछ सालों में भारतीय कारोबारी पर्यटकों को प्रोफाइल बदल गया है। पारंपरिक लक्जरी होटलों में हमेशा कारोबारी पर्यटकों के लिए एक अंतर मौजूद रहता है। हमारा उद्देश्य इस अंतर को भरने का है।'

- अनूठी विशाल औऱ आभास शर्मा (साभार – बिजनेस स्‍टैन्‍डर्ड)

Comments

#1 आधुनिकता का पैमाना

हां, आधुनिकता जरूरी है, लेकिन साथ ही परंपरा को भी जोडे रखा जाए तो सोने में सुहागा कहेंगे।

अच्‍छा लगा यह लेख।

धन्‍यवाद।